भारतीय जनजातीय शिक्षा का एक विश्लेष्णात्मक अध्ययन - An Analytical study of Tribal Education in India

Amit Ratna Dwivedi, Gopal Krishna Thakur

Abstract


जनजातियों के शोषण व इनकी दयनीय दुर्दशा के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी शिक्षा की कमी है। निरक्षरता से उत्पन्न अज्ञानता के कारण ही आदिवासी लोग नए आर्थिक सुअवसरों का लाभ नहीं उठा पाए। आदिवासी क्षेत्रों में विकासात्मक प्रक्रिया आरम्भ होने से दो विभिन्न शिक्षा प्रणालियाँ ‘एक परम्परागत तथा दूसरी तकनीकी आधारित’ उत्पन्न हो गयी जिससे उनमे शिक्षा प्राप्त करने की कौन सी प्रणाली को अपनाया जाय इसको लेकर द्वन्द उत्पन्न हो गया। प्रस्तुत शोध पत्र में आदिवासियों की संख्या, उनकी पहचान तथा भारतीय संविधान में आदिवासी से सम्बंधित प्रमुख प्रावधान एवं आदिवासियों की शैक्षिक स्थिति, शिक्षा में आने वाली समस्याएं व उनके समाधान पर प्रकाश डाला गया है। आदिवासी शिक्षा से सम्बंधित साहित्य का पुनरावलोकन कर आदिवासी समाज की शिक्षा पर प्रकाश डाला गया है।      

For the exploitation and suffering of the people, there is a lack of primarily responsible education. Owing to the increased reliability of indisputable population, the tribal did not take advantage of the new economic opportunities and the development process in the tribal areas led to two different systems of education “A tradition and technological base”. The idea has been created with which the system of education adopted in them and the stand has been created. In the research paper the name of aboriginals, their identity and the principal provisions concerning the aboriginal in the Indian constitution and the academic position of tribes, highlights the problem faced in education and their situations. The development of literature relating to adios education highlights the education of tribal society

  


Keywords


आदिवासी, परम्परा, विभिन्न आयोग, प्रचलित समाज

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ISSN 2348 –0874